सर्वसिद्धिप्रद: कुंभ: इलाहाबाद कुंभ मेला-2019 का लोगो जारी

Date posted: December 13, 2017    2:11 PM

इलाहाबाद:   यूनेस्को की सूची में शामिल हो चुके कुंभ मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। योगी सरकार ने संगम नगरी में 2019 में लगने वाले कुंभ का लोगो यानी प्रतीक चिह्न जारी कर दिया है। यह कुंभ मेला सर्वसिद्धिप्रद: कुंभ: के सूक्ति वाक्य को परिभाषित करेगा, जिसका अर्थ है सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला कुंभ। कुंभ के इस लोगों में धर्म और अध्यात्म को समझाया गया है और कुंभ मेले की प्राचीनता और महत्व को भी लोगों में समेटा गया है।  इसके बारे में और पढ़े..

कंस वध ,रुक्मिणी विवाह आदि कथा प्रसंग सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

Date posted: November 3, 2017    4:46 PM

नोएडा: सेक्टर 82 ईडव्ल्यूएस पॉकेट 7 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास आचार्य पुष्कर कृष्ण जी ने कंस वध का प्रसंग सुनाया | कंस द्वारा श्रीकृष्ण को मारने के तमाम प्रयास असफल होने के बाद उसने अक्रूर जी को मथुरा में उत्सव के बहाने कृष्ण और बलराम को लेने भेजा | गोकुलवासियों के मना करने के बाद भगवान कृष्ण उन्हें समझकर बलराम के साथ मथुरा पहुँचते हैं | कंस दोनों को मारने की योजना के अनुसार उनपर मदमस्त हाथी को छोड़ देता है ,भगवान उसका वध कर देते हैं | तब कंस अपने योद्धाओं चाणूर और मुस्टिक को मल्ल युद्ध के लिए भेजता है जिनका कृष्ण और बलराम वध कर देते है ,कंस चिंतित होता है | भगवान कृष्ण ,कंस को ललकारते हैं और उसके सिंघासन पर चढ़कर केश पकड़कर घसीटते हैं | इसके बारे में और पढ़े..

कृष्ण जन्मोत्सव पर झूम कर नाचे भक्त

Date posted: November 1, 2017    4:04 PM

नोएडा:  सेक्टर 82 ईडव्ल्यूएस पॉकेट 7 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य पुष्कर कृष्ण जी ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई | द्वापर युग में राजा उग्रसेन मथुरा में राज करते थे उनके आततायी पुत्र कंस ने उन्हें गद्दी से उतारकर स्वयं राजा बन बैठा | कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव से हुआ | कंस अपनी बहन से बहुत प्यार करता था | कंस अपनी बहन को ससुराल ले जा रहा था ,रस्ते में आकाशवाणी हुई कि हे कंस जिस बहन को तू इतना प्यार करता है उसका आठवां लाल तेरा काल होगा | कंस दोनों को कारागृह में डाल देता है और उनकी सात संतानों को मार देता है | वसुदेव देवकी की आठवीं संतान के रूप में स्वयं विष्णु भगवन प्रकट हुए | इसके बारे में और पढ़े..

अहंकार ही मनुष्य के पतन का कारण : पुष्कर कृष्ण

Date posted: October 30, 2017    5:39 PM

नोएडा:  ईडव्ल्यूएस पॉकेट 7 सेक्टर 82 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पुष्कर कृष्ण जी ने शिव सती विवाह का रोचक प्रसंग सुनाया | उन्होंने बताया कि दक्ष प्रजापति अपनी पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से करते हैं | दक्ष एक विशाल यज्ञ का आयोजन करते हैं लेकिन शिव से ईर्ष्यावश यज्ञ में आमंत्रण नहीं भेजते हैं |माता सती बिना बुलाये यज्ञ में जाने की जिद करती हैं | भगवान शिव के मना करने पर भी अपने पिता के घर पहुँचती हैं जहाँ पर अपने पति का अपमान देखकर यज्ञ कुंड में जलकर अपना शरीर त्याग देती हैं | इसके बारे में और पढ़े..

SC के आदेश के बाद हुई उज्जैन महाकाल की भस्मारती और अभिषेक

Date posted: October 28, 2017    2:12 PM

उज्जैन:  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज उज्जैन माहाकाल की भस्मारती शिवलिंग पर कपडा ढंककर की गई। साथ ही जलाभिषेक में आरओ के पानी का इस्तेमाल किया गया। ज्ञातव्य है कि उज्जैन महाकाल मंदिर में शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने से शिवलिंग को नुकसान हो रहा था। इस पर कोर्ट ने शिवलिंग का आकार छोटा होने से बचाने के लिए मंदिर समिति के 8 सुझावों को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज उज्जैन महकाल की भस्मारती में बदलाव किया गया है।  इसके बारे में और पढ़े..

उगते हुए सूर्य के अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व, घाटों पर भक्ति का सैलाब

Date posted: October 27, 2017    1:19 PM

नई दिल्ली/बिहार:  आज शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिन के छठ पूजा महापर्व का समापन हो जाएगा। बिना पुरोहित और बिना मंत्र के बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाला पर्व अब दिल्ली और एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) का भी मुख्य पर्व बन गया है। दिल्ली और आस-पास के इलाकों में रहने वाले पूर्वांचल के प्रवासियों का पहला प्रयास तो इस पर्व में अपने गांव जाने का होता है लेकिन एक तो संख्या ज्यादा होने और ज्यादातर परिवारों की तीसरी पीढी इस इलाके में बडी होने के चलते अपने मूल स्थान के बजाए लोग यहीं छठ मनाने लगे हैं। इसके बारे में और पढ़े..

छठ पूजा 2017 : आज है खरना, गुड़ की खीर खाने की परंपरा

Date posted: October 25, 2017    1:20 PM

नहाय खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व छठ पूजा का आज दूसरा दिन है। आज खरना है। इस मौके पर महिलाएं दिन भर उपवास करती हैं और शाम में भगवान सूर्य को खीर-पूड़ी, पान-सुपारी और केले का भोग लगाने के बाद प्रसाद को बांटा जाता है। खरना का मतलब होता है पूरे दिन का उपवास। व्रत रखने वाला व्यक्ति इस दिन पानी भी नहीं पी सकता। शाम होने पर गन्ने का जूस या गुड के चावल आदि प्रसाद खाया जाता है। खीर बनाने की भी खास विधि होती है। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर खीर तैयार की जाती है। इसमें आम की लकड़ी का प्रयोग जरूरी होता है। प्रसाद खाने के बाद व्रती सुबह के अर्घ्य तक उपवास करते हैं। इसके बारे में और पढ़े..

नहाय-खाय के साथ आज से महापर्व छठ शुरू, 34 साल बाद बन रहा महासंयोग

Date posted: October 24, 2017    11:52 AM

नई दिल्ली:  सूर्य उपासना का महापर्व छठ का आगाज आज नहाय खास के साथ शुरू हो जाएगा। आपको बता दें कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ ही लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो जाती है। चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। इसके महत्व का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है। इसके बारे में और पढ़े..

इस मुहूर्त में करेंगे दीपावली पूजन तो नहीं रहेगी पूरे साल पैसों की कमी

Date posted: October 19, 2017    1:31 PM

दीपोत्सव का महापर्व का 17 अक्टूबर 2017, मंगलवार से शुरू होगा। यह दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनवंतरी जयंती और भगवान कुबेर की पूजा अर्चना कर मनाया जाएगा। इसके बाद छोटी दीपावली, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजन और भाईदूज पर्व के साथ यह पर्व समाप्त होगा। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा करने से मनुष्य को उत्तम स्वास्थ और दीर्घ आयु की प्राप्ति व कुबेर पूजन से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। दीपावली के मौके पर यदि इन खास मुहूर्त में पूजन किया जाता है तो पूरे साल पैसों की कोई कमी नहीं रहती-  इसके बारे में और पढ़े..

धनतेरस: करें राशिवार उपाय, पैसा खिंचा चला आएगा

Date posted: October 17, 2017    2:25 PM

धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहते है इस दिन भगवान् धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। कहते है समुन्द्र मंथन के समय जब धन्वन्तरि का जन्म हुआ तब उनके हाथ में सोने का अमृत से भरा हुआ कलश था। क्योंकि वे कलश लेकर पैदा हुए थे इसीलिए इस दिन बर्तन खरीदने का रिवाज है। धनतेरस के दिन शाम को सूर्य अस्त के बाद दिया जलाएं और पास में कौड़ियां रखें, धनकुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करें। आधी रात के बाद 13 कौड़ियां घर के किसी कोने में गाड़ दें। इस उपाय से धन प्राप्ति के योग बनना शुरू हो जाते है, ऐसा माना जाता है। पैसे से जुडी परेशानियों को ख़त्म करने के लिए धनतेरस के दिन कुबेर यंत्र घर लाना चाहिए और इसे दुकान के गल्ले या घर की तिजोरी में स्थापित करना चाहिए। धनतेरस के दिन राशि के अनुसार नीचे लिखे उपाय किए जाएं तो धन-संपत्ति आदि का लाभ होता है। इसके बारे में और पढ़े..

« Older Entries