चुनावी मौसम आते ही राहुल जी जनेऊ निकाल मन्दिर पर्यटन पर निकलें: राजीव रंजन

पटना: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष की जारी मन्दिर यात्रा पर चुटकी लेते हुए पूर्व विधायक तथा भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने इसे चुनावी पर्यटन बताया. उन्होंने कहा “ गुजरात चुनावों के बाद अब कर्नाटक चुनाव देख कांग्रेस के ‘जनेऊधारी अध्यक्ष’ राहुल गांधी भक्ति एक बार फिर से जाग गयी है. एक अदद जीत के लिए तरस रहे कांग्रेस के युवराज की भक्ति 2004 में लोकसभा सदस्य बनने के बाद कभी नही जागी और इस बीच बहुसंख्यको के प्रति इनकी पार्टी का रवैया क्या रहा यह जग जाहिर है.

लेकिन लगातार मिली हार ने राहुल जी को गुजरात में इतने मन्दिरों में जाने पर विवश कर दिया जितने वह अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी नही गए थे. गुजरात चुनाव के बाद फिर से सो गयी राहुल जी की भक्ति अब कर्नाटक चुनाव को देख एक बार फिर जाग गयी है. राहुल जी किसी भी धर्म में आस्था रखेवह उनका निजी मसला हैउससे किसी को कोई दिक्कत नहीं हैबल्कि लोग उसका सम्मान करेंगे. लेकिन उन्हें भी यह समझना चाहिए कि महज वोट के लिए हिन्दू बनने का दिखावा बार-बार करना ठीक नही है, इससे बहुसंख्यक जमात की भावनाएं आहत होती हैं जिसका खामियाजा उन्हें गुजरात और हिमाचल में भुगतना भी पड़ा है. इसलिए राहुल जी दिखावे की राजनीति छोड़ देनी चाहिए.”    

श्री रंजन ने कहा “ बहुसंख्यकों के प्रति कांग्रेसी नेताओं ने हमेशा ही विरोधी रवैया अख्तियार किए रखा है. याद करें तो भगवान श्री राम के अस्तित्व को सवाल उठाने वाले और रामसेतु के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने वाले और कोई नही बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही थे. इसके अलावा राममन्दिर के खिलाफ इन्ही के नेता आज भी सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं. केरल में बहुसंख्यकों की भावनाओं को तार-तार करते इनके नेताओं ने गाय के साथ क्या किया था उसे पूरे देश ने मीडिया के माध्यम से देखा था. इसके बाद भी इन मसलों पर राहुल जी कि चुप्पी और चुनाव के समय उनका एकाएक जनेऊधारी बनने को लोग अगर सियासी ड्रामा नही कहेंगे तो और क्या कहेंगे.

राहुल की आस्था अगर सच्ची है तो उन्हें सबसे पहले कांग्रेस से उन नेताओं को बाहर निकालना चाहिए जो बहुसंख्यक समझ के खिलाफत करते रहते हैं. कांग्रेस के युवराज यह अच्छे से जान लें कि गुजरात की जनता की तरह कर्नाटक और अन्य राज्यों की जनता भी समझदार है तथा इस मुद्दे पर राहुल जी और उनकी पार्टी की कथनी और करनी को भलीभांति जानती है. इसलिए पहले कि तरह ही राहुल जी के सियासी पर्यटनो का कांग्रेस को कोई फायदा नही मिलने वाला. कांग्रेस अध्यक्ष को यह जान लें कि हिंदुत्व एक जीवनशैली है, इसलिए बजाए मन्दिरों में जा कर दिखावा करने के उन्हें जनता के हित में काम करना चाहिए और अगर उनके पास इसके लिए कोई योजना नही है तो वह केंद्र के जनहित कारी कार्यो में ही सहयोग करें.”

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