निकाय चुनाव में बड़ी जीत ही पार्टी के दामन को बचा सकती है: अभय सिंह

Date posted: October 28, 2017    6:51 PM

कहीं प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिष्ठा तो कहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह की नाक का सवाल बने निकाय चुनाव उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की 2019 के लिए नई दिशा तय करेगी। प्रदेश में चाहे बसपा की सरकार रही हो या समाजवादी पार्टी की सरकार निगमों पर कब्जा हमेशा भारतीय जनता पार्टी का ही रहा है। प्रदेश में निवर्तमान 12 नगर निगमों में 11 नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा, इससे पूर्व के चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी 12 में से 10 नगर निगम में सत्तासीन थी। इस बार प्रदेश के निकाय चुनाव में नगर निगमों की संख्या कुल 16 हो गई है, 4 नए बने निगमों में अयोध्या और फैजाबाद को मिलाकर फैजाबाद नगर निगम, मथुरा और वृंदावन को मिलाकर मथुरा नगर निगम, फिरोजाबाद एवं सहारनपुर नगर निगम शामिल है। भारतीय जनता पार्टी के लिए निगम की इन 16 सीटों में जीत हासिल करना कितना महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठापरक इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

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महात्मा गाॅधी – दहेजप्रथा और बाल विवाह

Date posted: October 3, 2017    12:37 PM

महात्मा गांधी को (महात्मा) उनके महान कार्यो और महानता के लिए कहा जाता है जो की उन्होंने जीवन भर किया। गांधीजी का पूरा जीवन ही अहिंसात्मक तरीके से सत्य के प्रयोगों की प्रयोगशाला रहा है। गांधी का सत्याग्रह कोई आसान काम नहीं है न ही कमजोर दिल वालों का काम है। सत्याग्रह केवल बहुत ही साहसी व बहादुर लोग ही कर सकते हैं। गांधीजी ने अपने सत्याग्रह की परिभाषा कुछ इसी तरह से दी थी कि सत्याग्रह, सत्य का आग्रह है। यदि आपको लगता है कि आप सत्य की तरफ हैं, तो जीवन की परवाह किए बिना भी सत्य की रक्षा कीजिए और यदि सत्य के पक्ष में रहने से आपको मृत्यु भी प्राप्त होती है, तब भी अपनी अन्तिम सांस तक सत्य के पक्ष में खडा रहना ही सत्याग्रह है। जबकि उस सत्य का आग्रह करते समय किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए।

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शिव ‘‘राम‘‘ नाम के दाता

Date posted: September 24, 2017    12:53 PM

श्री रामचरितमानस के रचयिता पूज्य गुरुदेव भगवान गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने राम कथा व राम नाम महिमा, रहस्य, महत्व और उसके प्रभाव के बारे में ग्रंथ में बेमिसाल उदाहरण प्रस्तुत कर इस पर प्रकाश डाला। गुरुदेव लिखते हैं रामचरितमानस लिखने से पूर्व उन्होंने 82 वर्षों तक वेद पुराण शास्त्र आदि ग्रंथों को पढा समझा तथा अपनी सिद्धियों से भी बहुत कुछ अर्जित किया। 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन में यह रामचरित मानस पूरा हुआ।  बाबा लिखते हैं रचि महेश निज मानस राखा शुभ अवसर पाई सिवा सन भाषा। पुनि काकभुशंडि को दीना रामभक्त अधिकारी चीना। तेहि याज्ञवल्म को सुनावा याज्ञवल्म फिर भारद्वाज मुनिश्रेष्ठ गावा अर्थात रामचरितमानस के चार घाट हैं। पहला भगवान शिव ने मां पार्वती को सुनाया फिर भोले बाबा ने रामभक्त व अधिकारी जानकर काकभूसण्डी को दिया। काकभूसण्डी ने याज्ञवल्म को दिया याज्ञवल्क्य ने भारद्वाज ऋषि को दिया।

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‘‘अजानबाहू है मोदी जी‘‘

Date posted: September 20, 2017    6:32 PM

हाथ से किया हुआ दान और मुख से लिया प्रभु श्री राम का नाम कभी व्यर्थ नहीं जाता। हाथ होते हैं सेवा के लिए यदि देश सेवा में हाथ लगे तो वह कल्याणकारी प्रभावी वह प्रेरणादायक साबित होते हैं। लंबे हाथों की लंबी पकड़ होती है और वह अजानबाहू कहलाते हैं। अजानबाहू को बहुत-बहुत शुभ माना जाता है। भारत की मनीषा जब अपनी इस बात को प्रमाणित कर विश्व को संपूर्ण चराचर को समझा रही थी तब हमको लगता था यह एक शारीरिक बनावट तक है यानी हमारे यहां अजानबाहू उसको कहते हैं जिसके हाथ इतने लंबे हो कि वह घुटनों के नीचे तक जाते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम मानव अवतार में अजानबाहू कृष्ण कन्हैया अजानबाहू बाबा भीष्म व अश्वोत्थामा भी-घुटनों से लंबी भुजा वाले थे। महात्मा गांधी की भुजाएं लम्बी थी। प्राकृतिक रूप से यह दुर्लभ शरीर बिरलो को नसीब होता है संसार में हिंदू मुस्लिम हो इसाई हो कोई भी अजानबाहू हो बहुत शुभ होता है।

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पाठशाला है राम नाईक

Date posted: September 9, 2017    2:07 PM

भारत में ही नहीं पूरे दुनिया में लोग प्रसाद पाते हैं खाते हैं। दुकान से घर से मिठाई ली और भगवान के मन्दिर में चढ़ा दी वह प्रसाद कहलाती है। प्रसाद का अर्थ क्या है, क्या लड्डू , पेड़ा आदि जो बाजार में अथवा घर में है वो मन्दिर में जाकर बदल गया नहीं वह लड्डू पेड़ा ही रहता है। फिर प्रसाद का मतलब क्या हुआ बहुतों से विनोद में पूछा भी कोई सही नहीं बता सका। श्रीराम चरित्र मानस में पूज्य गुरूदेव भगवन तुलसीदास जी ने लिखा – नाम प्रसाद षम्भू अविनाषी अर्थात राम नाम की कृपा से षिव अविनाषी है। प्रसाद का सही अर्थ है कृपा। भगवान को भोग लगाने से उनकी कृपा मिल जाती है। राज्यपाल राम नाईक के तीन वर्ष के कार्यकाल को उनकी जनसेवा की रूचि प्रीति को देखकर हम कह सकते हैं वह प्रसाद हैं अर्थात कृपा हैं। ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है। इसके बारे में और पढ़े..

विदेशी भाषा बनाम राष्ट्रभाषा – क्या हिंदी का राष्ट्र भाषा होना एक दिखावा है?

Date posted: August 28, 2017    12:52 AM

हिन्दी शिक्षा माध्यम का आर्थिक लाभ

(एक)  ऐतिहासिक घटा हुआ उदाहरण: एक  घटा हुआ ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ।चौधरी  मुख्तार  सिंह  एक देशभक्त हिन्दीसेवी शिक्षाविद थे। १९४६  में वायसराय  कौंसिल  के सदस्य चौधरी मुख्तार  सिंह ने  जापान और  जर्मनी की यात्रा  की थी; और यह अनुभव किया था,  कि यदि भारत को कम  (न्यूनतम) समय में  आर्थिक  दृष्टि से  उन्नत होना है तो उसे, जन भाषा में, जन वैज्ञानिक शिक्षित करने  होंगे  इसके बारे में और पढ़े..

देश का दीपक दीनदयाल

Date posted: August 26, 2017    7:41 PM

दीपक मिट्टी को हो अथवा सोने  यह बात महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि वह कितना प्रकाश देता है अंधेरा दूर करता है यह महत्व की बात है। दीनदयाल जी ऐसे ही भारत माता के दीपक हुए हैं जिन्होने अंधकार को दूर किया है मानव में मानवीय गुनो को भरा है। भारत भूमि पर जीवन के मरण के साथ ही जीवन ही जीवन का स्मरण भी होता है। इसे देवभूमि ने सम्पूर्ण धरा को अपने गुणों से, व्यवहार से सुगन्धित करने वाले देवांे जैसे महापुरूष दिए है। महापुरूष की अवस्था कभी काल के गाल में नही समाती बल्कि वह काल के कपाल पर नित् लिखता मिटाता है रोज गीत नए गाता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपनी एक कविता में उक्त लाइन लिखी थी। हमारे देश में कहा जाता है कि जन्म से कोई महान नही होता परन्तु कर्म से व्यक्ति जरूर महान मार्ग दर्शक होता है।

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एकल अभिनय से तुलसीदास के जीवन का सजीव चित्रण

Date posted: August 26, 2017    7:52 PM

शनिवार की शाम तुलसीदास को नजदीक से जानने, समझने तथा उनकी कृतियों को महसूस करने का था। मंच पर विश्व विख्यात निर्देशक व कलाकार पद्मश्री शेखर सेन थे। महानगर इनकी प्रतिभा का कायल हो उठा। तीन घंटे तक तुलसीदास की श्री रामचरितमानस में हर मन खो गया। मंत्री से लेकर संतरी और आमजन से अमीर सब के सब तुलसीदास में रम गए। इस तुलसीदास को शानदार अंदाज में शेखर सेन ने जीया और सबको राम-राम, सीता-राम में खोने पर मजबूर कर दिया। काशी से अयोध्या का दर्शन कराया तो समाज को भक्ति के रंग में रंगने का भी संदेश दिया। इसके बारे में और पढ़े..

मायावती का आना जाना

Date posted: July 22, 2017    1:54 PM

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी कर उनको शैतान की औलाद कह कर मायावती ने अपनी समझ का परिचय दिया था। उस समय तक मायावती को कोई बडा नेता नही मानता था न ही जनता था। मान्यवर काशीराम जी बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। मुलायम सिंह यादव जी की पार्टी सपा व काशीराम की पार्टी बसपा ने उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा। सपा-बसपा की सरकार बनी। मुलायम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बसपा ने मायावती को उत्तर प्रदेश बसपा का प्रभारी बनाया। घोर जातिवादी राजनीति का दौर था। वहां तरह तरह के नारे लगाए जाते थे। उसी समय मायावती ने कहा कि माहत्मा गांधी ने अनुसूचित जाति को हरिजन का नाम दिया जब अनुसूचित जाति हरिजन है तो क्या गांधी जी शैतान की औलाद है। जबरदस्त विरोध कांग्रसियों ने किया, धरने पर बैठ गई कांग्रेस पार्टी। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने मायावती के बयान से पल्ला झाड़ते हुए उससे असहमति जताई।

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‘‘ढलता सूरज‘‘

Date posted: July 15, 2017    6:59 PM

सूफी संत पीर भूल्लेशाह ने कहा  है कि इस संसार में उगता सूरज तो चढ़ता व ढलता देखा है लेकिन ढलता सूरज कभी भी चढता नहीं देखा गया। उन्होने गाया कि ‘‘चढदा सूरज ढलता देखा बुझता दीया बलता देखा‘‘, हीरे दा कोई मौल न जान-खोटा सिक्का चलता देखा, जिन्हादा नही कोई जग में वो भी पुत्तर पलदा देखा, उसदी रहमत दे नाल बंदा पानी उत्ते चलदा देखा। लोगी कंहदे दाल नी गल्दी मैं तो पत्थर गलदे देखा, जिन्हा नू कदर नहीं कीती रब दी खाली हाथ वो मलदा देखा कुछ तो नगें पैरी फिरदे सिर ते लम्बहन छाया मेरा दाता मैनू सब कुछ दीता क्यों ना शुकर मनाया। ‘‘

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