प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंची नॉएडा की आवाज़ , बचाएंगे 280 प्रजातियां
Date posted: 20 December 2018

नॉएडा – शहर के युवा समाजसेवी श्री रंजन तोमर द्वारा पिछले कुछ समय पहले जैव विविधता प्राधिकरण में लगाई गई आर टी आई से कई बातें सामने आई थी , जिनसे यह खुलासा हुआ था की – 16 राज्यों और 2 केंद्र शाषित क्षेत्रों द्वारा पर्यावरण और वन मंत्रालय और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दी गई जानकारी के अनुसार देश में 280 से ज़्यादा पौधे एवं जानवरों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं अथवा उनपर जल्द ही विलुप्त होने की श्रेणी में आने का अंदेशा है , जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा श्री तोमर को दी गई जानकारी के अनुसार केरल में 26 पौधे एवं 13 पशु प्रजाति इस लिस्ट में हैं , तमिल नाडु में 23 पौधे एवं 16 पशु प्रजाति , उत्तराखंड में 16 पौधे एवं 15 पशु प्रजाति इसमें शामिल हैं , उत्तर प्रदेश में मात्र एक पौधे की प्रजाति इस लिस्ट में शामिल हुई है। इसी प्रकार बिहार ,गोवा ,हिमाचल प्रदेश , मध्य प्रदेश , मणिपुर , मिजोरम , मेघालय , उड़ीसा , पंजाब , त्रिपुरा , पश्चिम बंगाल समेत अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह , एवं दमन एवं दिउ की जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई थी।
यह खबर राष्ट्रिय स्तर पर खूब चर्चा में रही और कई राष्ट्रीय समाचार पत्रों ने इसे प्रमुखता से छापा गया , इस दौरान श्री रंजन तोमर ने इस खबर को खबर ही न रह जाए की नीति के कारण प्रधानमंत्री को पत्र लिख कुछ कानूनी सुझाव , एक्ट में बदलाव आदि की बात कही थी , अब प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा यह जानकारी दी गई है के इन बातों एवं सुझावों पर अमल किआ जाएगा , ऐसे में पर्यावरण प्रेमियों में इस बाबत ख़ुशी की लहर दौड़ गई है के विलुप्त होती प्रजातियों के लिए कुछ ठोस कदम उठाये जायेंगे , हाल ही में श्री तोमर की आर टी आई से यह खुलासा भी हुआ था के पिछले दस साल में 384 शेर मारे गए हैं ,जो लगभग सभी समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित हुआ और जिससे शेरों के प्रति जागरूकता को फिर से प्रोत्साहन मिला है। श्री तोमर ने प्रधानमंत्री का इस बाबत धन्यवाद भी दिया जिस तरह उनकी बात का संज्ञान लिया गया है।
गौरतलब है के बढ़ते प्रदुषण एवं जलवायु परिवर्तन के कारण यह घटनाएं घटित हो रही हैं , इंसान की लोलुपता का असर यह है के अन्य प्रजातियां विलुप्त हो भी चुकी हैं और होती जा रही हैं , श्री तोमर का यह आर टी आई लगाने का उद्देश्य भी यह ही था के आम जनता तक यह जानकारी पहुंचे के किस प्रकार उनकी छोटी छोटी गलतियों और लालच के कारण ही हमारा ग्रह धीरे धीरे अपने वास्तविक व्यवस्था को खोता जा रहा है।
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