सहकारिता आंदोलन देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा: श्याम जाजू

नई दिल्ली:  भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली प्रभारी श्याम जाजू एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आज दिल्ली के सहकारिता क्षेत्र के मुख्य पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल संवाद किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संजय गर्ग, अशोक डबास, सुनील गुप्ता एवं सहकारिता क्षेत्र के पदाधिकारी जुड़े थे।

श्याम जाजू ने कहा कि भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले से चल रहा सहकारिता आंदोलन आज विराट रूप धारण कर चुका है और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके चलते देशवासी आर्थिक रूप से समृद्ध तो हुए हैं। भाजपा सरकार के प्रयास से अब सहकारी संस्थाओं की संख्या में तो वृद्धि हुई, लेकिन सहकारिता का जो मूल तत्व था वह धीरे-धीरे समाप्त हो रहा था क्योंकि कांग्रेस वाले सालों से इस क्षेत्र पर हावी थे। सहकारिता की इस पृष्ठभूमि, सहकारिता को स्वायत्तता देने की मांग तथा सहकारिता आंदोलन को और बलवती बनाने के लिए सहकार भारती अस्तित्व में आई है। समय के मांग के अनुसार क्षेत्र में मूलभूत काम करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र अपनी भूमिका का निर्वहन आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में सक्षमता के साथ कर रही हैं जिसके अंतर्गत हर वंचित और कमजोर वर्गों का विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भाजपा के विचारधाराओं का प्रभाव कैसे रहे और उसका सकारात्मक परिणाम कैसा निकले इस पर काम करने की जरूरत है जिससे नए नेतृत्व का विकास होगा।
आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना संकट में कई चुनौतियां होने के बाद भी सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गरीब-जरूरतमंद लोगों की सहायता के जरिए अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कोई कमी नहीं रखा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब सहकारिता आंदोलन की शुरुआत हुई थी और सहकारिता ही राजनीति को दिशा दिखाने का जरिया था। लेकिन कांग्रेस और समाजवादी लोगों ने सहकारिता आंदोलन को अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए और अपने वर्चस्व को बढ़ाने का साधन बनाया। आज के समय में समाज की बहुत बड़ी जरूरत है सहकारिता। कितने काम समाज के लाभ के लिए सहकारिता के माध्यम से हो सकते हैं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहकारिता क्षेत्र को एक नई पहचान देने का काम किया है। लोकतांत्रिक साधन और स्वयंसेवी तथा पारस्परिक सहायता पर आधारित सहकारी संस्थाओं को संगठित करके विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों के शोषण को रोकने तथा उनके सामाजिक – आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु सहकारिता विधान का उद्देश्य परिभाषित किया है। इस क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता भी बढ़ी है, जैसे कि सेल्फ हेल्प ग्रुप हैं जो सहकारिता आंदोलन का ही हिस्सा है और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
श्री गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में 5000 से अधिक सहकारी संस्थाएं काम कर रही है, जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आभाव है जिसे बहाल करने की जरूरत है। पिछले वर्षो में बड़ी संख्या में क्रेडिट सोसाइटी का निर्माण हुआ है। दिल्ली के प्रत्येक सहकारी संस्था में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बनी रहे और ज्यादा से ज्यादा उसमें लोगों की सहभागिता हो इसके लिए दिल्ली भाजपा काम करेगी। उन्होंने बताया कि आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व तक सहकारिता के विकास एवं उन्नति और समस्याओ के समाधान के लिए दिल्ली में कोआपरेटिव डेवलपमेंट बोर्ड का गठन होता था, परन्तु पिछले दस वर्षो में बार-बार मांग करने पर भी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। दिल्ली सरकार को जल्द से जल्द इस बोर्ड का गठन करना चाहिए, और इस बोर्ड में सहकारिता मंत्री, पंजीयक सहकारी संस्थाओ के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिए।
श्री गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में अधिकांश सोसाईटी रिहायशी क्षेत्रांे में चल रही है सोसाईटीज को अन्य व्यवसायिक गतिविधिओं से बाहर माना जाना चाहिए क्योकि सोसाईटी में स्वयं के लिए लाभ नहीं कमाया जाता या इन सोसाइटीज को रिहायशी क्षेत्रों में चलनेवाली गतिविधिओं में शामिल किया जाना चाहिए ताकि सीलिंग जैसी स्थिति से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि सहकारिता के कानून में सुधार के लिए तथा सहकारिता के विकास में अवरोध डालने वाले कानून को बदलने की दृष्टि से कोआपरेटिव लॉ कमेटी की स्थापना की जानी चाहिए। दिल्ली में सहकारिता के क्षेत्र में क्रेडिट सोसाइटी, उपभोक्ता भंडार, कोआपरेटिव बैंक, हाउसिंग की प्रबलता है। विशेषकर युवाओं और महिलाओं की सहकारी संस्थाओं का निर्माण ,शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यटन, बीमा, लेबर, स्कूल-कॉलेज में कैंटीन, प्रशिक्षण इत्यादि की सहकारी संस्थाओ के विकास पर ध्यान देने की दृष्टि से पहले की तरह एक हाई पावर कमेटी उच्चाधिकार समिति बनाई जानी चाहिए जो सहकार नीति का निर्माण करने और सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए परामर्श दात्री संस्था के रूप में काम करे। देश की कुल आबादी का 65 प्रतिशत युवाओं का है, परन्तु सहकारिता के क्षेत्र में युवाओ की संख्या न के बराबर है। अतः युवाओं को सहकारिता के प्रति प्रेरित करने के लिए सहकारिता को स्कूल कॉलेज के पाठ्य क्रम में शामिल किया जाना चाहिए। युवाओं और महिलाओं की सहकारिता के विकास के लिए अलग से प्रोत्साहित करने की योजना बनाई जानी चाहिए।
श्री गुप्ता ने कहा कि डिफाल्टर सदस्यों की समस्या, दोहरी सदस्यता पर रोक, सहकारिता विभाग की वेबसाइट से संबंधित समस्याओं, ऑडिट की सुविधा इत्यादि समस्याओं एवं उसके समाधान के लिए दिल्ली भाजपा इन मांगों को मजबूती के साथ दिल्ली सरकार के सामने रखेगी।

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