मध्यावधि परीक्षा परिणामों से दिल्ली सरकार के शिक्षा पर किये तमाम दावो की खुली पोल-मनोज तिवारी
Date posted: 29 November 2018

नई दिल्ली, 29 नवम्बर। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के मध्यावधि परीक्षा में कई विद्यालयों के परीक्षा परिणाम बेहद खराब होने पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि दिल्ली में स्कूल, अस्पताल की राजनीति करने वाली आम आदमी पार्टी का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है। झूठ और भ्रम की राजनीति करने वाले केजरीवाल जनता से किये अपने चुनावी वायदों को पूरा करने में पूरी तरह से विफल हुये हैं। मनीष सिसौदिया का दावा कि दिल्ली का मॉडल गुजरात मॉडल से कहीं अच्छा है, ऐसे झुठ की पोल दिल्ली के 27 सरकारी स्कूलों ने खोल दी है।
श्री तिवारी ने कहा कि दिल्ली शिक्षा निदेशालय की इंस्पेक्शन ब्रांच ने मध्यावधि परिक्षा में खराब प्रदर्शन करने की वजह जानने के लिए परीक्षा परिणाम की जांच कराने का निर्णय लिया। जिसमें इंस्पेक्शन ब्रांच ने दिल्ली के 27 स्कूलों को चयनित किया। जिनका परीक्षा परिणाम जीरो से पांच फीसदी के बीच रहा जो कि आम आदमी पार्टी के शिक्षा को लेकर अपनी पीठ थप-थपाने के तमाम दावों की पोल खोल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ोसी राज्यों को चुनौती देने वाले केजरीवाल अफवाह फैलाने और मीडिया में सस्ती लोकप्रियता बटोरने में जुट जाते है जिसमें आम आदमी पार्टी की पूरी टीम झूठ और अफवाह का ऐसा माहौल तैयार करते है जिससे लगे कार्य हो रहा है लेकिन केजरीवाल ये भूल जाते है कि दिल्ली की शिक्षित जनता उनके इस तमाम नाटक पर बखूबी नजर रखे हुये है और तय समय पर उनको जरूर जवाब देगी।
श्री तिवारी ने कहा कि केजरीवाल सरकार दिल्ली के विकास कार्यो में अपने किसी भी योगदान को साबित नहीं कर सकती है। दिल्ली सरकार के तीन साल के शासन में शिक्षा के नाम पर बेमिसाल प्रचार हुआ परंतु धरातल पर शिक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया। शिक्षा के दो साल के बजट में से 1982 करोड़ बिना खर्च किए चला गया जो कि दिल्ली के इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में बिना खर्च की गई सबसे ज्यादा राशि रही है। केजरीवाल सरकार का शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने का दावा वहीं खत्म हो जाता है जब सरकारी आंकड़ों से यह पता चलता है कि जहां 2013-14 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 17.75 लाख विद्यार्थी थे वे केजरीवाल की सरकार के समय 2015-16 में कम होकर 16.77 लाख रह गए जबकि प्राइवेट स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पिछले दो वर्षों में 1.42 लाख बढ़ी है। इसी प्रकार 10वीं के बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम भी 98.40 प्रतिशत से कम होकर 91 प्रतिशत रह गया है। आम आदमी पार्टी ने यह वायदा किया था कि सत्ता में आने के बाद 500 नए स्कूल बनाएगी लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली के कई सरकारी स्कूलों के क्लासरूम में दो सेक्शन के विद्यार्थियों एक साथ बैठने को मजबूर है।
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