September 11, 2026 | 16:17:25

गो-सेवा आयोग के 25 सूत्रीय एजेंडे पर बैठक सम्पन्न

11 Sep 2026
गो-सेवा आयोग के 25 सूत्रीय एजेंडे पर बैठक सम्पन्न

लखनऊ:    उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा गोशालाओं को प्राकृतिक कृषि, जैविक उर्वरक, बायोगैस, पंचगव्य आधारित उत्पादों एवं ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग एवं न्च्ब्।त् के संयुक्त सहयोग से 9 सितम्बर को कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण अंतरविभागीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में गो-सेवा आयोग द्वारा प्रस्तुत 25 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के प्रारम्भ में गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष  श्याम बिहारी गुप्ता ने गोवंश संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत वर्तमान में 1 से 4 गोवंश सुपुर्द किए जाने की सीमा को बढ़ाकर अधिकतम 10 गोवंश तक किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे अधिक संख्या में इच्छुक कृषक एवं पशुपालक गोवंश संरक्षण से जुड़ सकेंगे तथा योजना की पहुंच और प्रभाव दोनों में वृद्धि होगी।


आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने विभिन्न मंडलों एवं जनपदों के भ्रमण तथा गोशालाओं के निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों का उल्लेख करते हुए कुछ स्थानों पर संबंधित पदाधिकारियों की लापरवाही एवं अनुपस्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने अपेक्षा की कि गोशालाओं की व्यवस्थाओं में लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो तथा संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी गोवंशों की देखभाल एवं गोशाला प्रबंधन के प्रति पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।


आयोग के माननीय सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं अथवा अन्य कारणों से घायल होने वाले गोवंशों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 24×7 समर्पित एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया, जिसके माध्यम से घायल गोवंश को तत्काल उठाकर निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा उपयुक्त चिकित्सा केन्द्र तक पहुंचाया जा सके।


माननीय सदस्य  दीपक गोयल ने गोशालाओं में मृत होने वाले गोवंशों के सम्मानजनक एवं व्यवस्थित निस्तारण के लिए, स्थानीय परिस्थितियों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप, उपयुक्त समर्पित स्थल विकसित किए जाने का सुझाव रखा, जिससे मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था व्यवस्थित एवं स्वच्छ तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
माननीय सदस्य श्री राजेश सिंह सेंगर ने गोशालाओं में अव्यवस्था के लिए उत्तरदायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए, आवश्यकता पड़ने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के लिए निरीक्षण के दौरान पाई जाने वाली गंभीर कमियों पर प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है, जिससे संबंधित अधिकारी गोशाला प्रबंधन को गंभीरता से लें।


कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने आयोग के अध्यक्ष एवं माननीय सदस्यों द्वारा रखे गए सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने विभिन्न प्रस्तावों को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के मध्य समन्वय पर भी बल दिया।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी प्राथमिकता गोशालाओं को अधिक व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दृष्टि से गोवंश संरक्षण को केवल आश्रय एवं देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे प्राकृतिक खेती, जैव ऊर्जा, जैविक उत्पाद, महिला स्वावलंबन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

किसानों के यहां वी.बी.जी.-रामजी योजना के अंतर्गत पक्के कैटल शेड, यूरिन टैंक एवं नाद के निर्माण, बड़े गो संरक्षण केन्द्रों एवं अस्थायी गो आश्रय स्थलों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना तथा गोबर एवं गौमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत एवं अन्य कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनके विपणन की व्यवस्था पर विचार किया गया। गोबर-गोमूत्र से निर्मित खाद, पेस्टीसाइड, हर्बीसाइड, फंजीसाइड आदि को सहकारी समितियों एवं कृषि विपणन व्यवस्था के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने तथा उर्वरक विक्रय केन्द्रों पर ऐसे उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।


गोशालाओं एवं गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए थ्च्व् एवं स्वयं सहायता समूहों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा ग्रामीण महिलाओं को गोबर एवं गौमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण एवं विपणन से जोड़ने पर भी विचार किया गया। इसी क्रम में गोचर भूमि में चारागाह विकसित करने, अवैध कब्जों को हटाने तथा कृषक पशुपालकों को भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (प्ळथ्त्प्), झांसी में प्रशिक्षण दिलाने के विषय पर भी चर्चा हुई।


अस्थायी गो आश्रय स्थलों में गोवंशों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता बताई गई। गोवंशों का उचित वर्गीकरण करते हुए नंदी, मादा गोवंश एवं छोटे बछड़ों के लिए पृथक-पृथक शेड की व्यवस्था किए जाने तथा गोवंशों के आकार एवं आयु के अनुरूप चरही, चरनी एवं नांद का निर्माण सुनिश्चित करने पर विचार किया गया। साथ ही वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने तथा पर्याप्त मात्रा में भूसे के भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने पर भी विशेष चर्चा हुई, ताकि चारे की कमी के कारण गोवंशों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।


बैठक में गोशालाओं एवं गो आश्रय स्थलों के संचालन में गौ-सेवी संस्थाओं एवं महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी, प्रदेश में ब्ठळ प्लांट स्थापित किए जाने की रणनीति, गोदुग्ध के मूल्यवर्धन, पंचगव्य आधारित औषधियों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने तथा निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक लोगों को गोवंश संरक्षण से जोड़ने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। ब्ैत् के माध्यम से उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने तथा पंचगव्य आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से गोपालन एवं पंचगव्य उत्पाद निर्माण के क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

गोवंश के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक गोशाला में बीमार एवं अशक्त गोवंश की चिकित्सा के लिए लिफ्टर/कैटल क्रश (अड़गड़ा) की व्यवस्था किए जाने पर विचार किया गया। इसी क्रम में सड़क पर घायल गोवंशों के लिए समर्पित एम्बुलेंस व्यवस्था के सुझाव को भी महत्वपूर्ण माना गया। राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट रहने वाले गोवंशों के गले में रेडियम पट्टी लगाने तथा गो आश्रय स्थल वाले ग्रामों में सहजन, सुबबूल, बरगद, नीम एवं पाकड़ आदि के व्यापक वृक्षारोपण के विषय भी बैठक में उठाए गए।

बैठक में गोशालाओं से गोबर/कम्पोस्ट की खरीद तथा सहकारिता विभाग के माध्यम से उसके विपणन, गोशालाओं में केयरटेकर की समयबद्ध उपलब्धता एवं भुगतान, निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत भुगतान में आ रही कठिनाइयों के समाधान तथा बड़े एवं अस्थायी गो आश्रय स्थलों में नर, मादा, बीमार एवं छोटे गोवंश के लिए पृथक व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे व्यावहारिक विषयों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री दीपक कुमार ने संबंधित विभागों को आयोग द्वारा प्रस्तुत विषयों पर आवश्यक समन्वय के साथ आगे की कार्यवाही के लिए आश्वस्त किया। यह भी तय किया गया कि इन प्रस्तावों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने के लिए पशुपालन, ग्राम्य विकास, कृषि, सहकारिता तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ शीघ्र ही एक विस्तृत एवं गहन अंतरविभागीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न प्रस्तावों की विभागवार व्यवहार्यता, उपलब्ध योजनाओं से उनका समन्वय तथा आवश्यक निर्णयों के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा पर विचार किया जाएगा।

गो-सेवा आयोग का प्रयास है कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण को “संरक्षण से संवर्धन और संवर्धन से स्वावलंबन” की दिशा में आगे बढ़ाया जाए, ताकि गोशालाएं केवल गोवंश के आश्रय स्थल न रहकर प्राकृतिक खेती, जैव ऊर्जा, जैविक एवं पंचगव्य उत्पाद, महिला उद्यमिता तथा ग्रामीण रोजगार के प्रभावी केन्द्र के रूप में विकसित हो सकें।

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