November 06, 2026 | 23:45:24

लखनऊ में 68 अधिवक्ताओं को मिलेगा मध्यस्थता प्रशिक्षण, 40 घंटे का विशेष कार्यक्रम शुरू

03 Nov 2026
लखनऊ में 68 अधिवक्ताओं को मिलेगा मध्यस्थता प्रशिक्षण, 40 घंटे का विशेष कार्यक्रम शुरू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुलभ और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सोमवार को 40 घंटे के विशेष मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 6 नवंबर 2026 तक न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई), गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपद न्यायालयों में कार्यरत 68 चयनित अधिवक्ता मध्यस्थ हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया और न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक रेखा अग्निहोत्री की उपस्थिति में हुआ।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ता मध्यस्थों को विवादों के प्रभावी निस्तारण, आपसी सुलह और समझौते के लिए जरूरी कानूनी जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। इसके माध्यम से प्रदेश में वैकल्पिक विवाद समाधान यानी ADR व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान अधिवक्ताओं को मध्यस्थता की तकनीकों, विवादित पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने, साझा हितों की पहचान करने और दोनों पक्षों की सहमति से न्यायसंगत समाधान निकालने के तरीके सिखाए जाएंगे।

इस अवसर पर मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) के वरिष्ठ मास्टर ट्रेनर एवं अधिवक्ता नीरज उपाध्याय तथा अधिवक्ता एवं मध्यस्थ रोहित उपाध्याय द्वारा लिखित पुस्तक 'मध्यस्थता वकालत' (Mediation Advocacy) का विमोचन भी किया गया।

यह पुस्तक विवादों के समाधान में रचनात्मक सोच, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग की भूमिका को रेखांकित करती है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से मध्यस्थता व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे अदालतों में लंबित विवादों के बोझ को कम करने और आम नागरिकों को त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

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